बेटे को नेपाल से लाने के लिए मां ने चार साल मांगी भीख

0
19

नेपाल की एक जेल में बंद इकलौते बेटे को छुड़ाने के लिए 70 वर्षीय मां ने चार साल तक बनारस की सड़कों पर भीख मांगा। जहां-तहां हाथ फैलाये। इस दौरान कुछ संवेदनशील युवाओं का साथ मिला। उनकी मदद से मां के पास बेटे को छुड़ाने लायक राशि जुट गई। और, वह शनिवार को अपने बेटे को लेकर बनारस पहुंचीं तो यहां युवाओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। मां के तप को सराहा।संतान के लिए मुश्किलों से दो-दो हाथ करने में गुरेज न करने वाली ममता से जुड़ी यह गाथा पांडेयपुर की वृद्धा अमरावती की है। महेन्द्र की सन-2016 में शादी हुई थी। शादी के बाद लोन लेकर मालवाहक निकाला था। उसी वाहन से माल पहुंचाने नेपाल गया था। वहां उसके वाहन से हुई दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि दूसरा घायल हो गया था। महेन्द्र को वहां की अदालत से सजा हो गई। साथ ही मृतक आश्रित और घायल को भारतीय मुद्रा में पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का भी आदेश हुआ। इसकी जानकारी मिलने पर बूढ़ी मां ने भीख मांगना शुरू कर दिया। घाट, मंदिर, शहर की गलियों में घूमती रहीं। उसी दौरान दो साल पहले बेनिया के समाजसेवी विकास साहू सोनू का साथ मिला। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लेकर कई लोगों से गुहार लगाई लेकिन कहीं मदद नहीं मिली। फिर वह खुद बूढ़ी मां के साथ भिक्षाटन से राशि जुटाने में जुट गये।विकास ने बताया कि आठ दिसंबर 2020 को सजा पूरी होने के बाद भी हर्जाना राशि न दे पाने के कारण महेन्द्र को जेल में रखा गया था। काफी मशक्कत के बाद महज ढाई लाख जुट सके थे। तब नेपाल के चौधरी फाउंडेशन से संपर्क किया गया। बाकी राशि उनसे मिलने का आश्वासन मिला। वह 17 जनवरी को अमरावती देवी के साथ नेपाल पहुंचे। वहां फाउंडेशन की मदद से पीड़ितों को हर्जाना देकर नवल परासी जेल से महेंद्र को छुड़ाया गया। शनिवार को सभी वाराणसी पहुंचे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here